Tuesday, August 26, 2008

में शब्द हूं


एक शब्द मिला कल मुझे सड़क पर
बढ़ा रहा मुझे देख कर अपने कर
क्य मुझे गले न लगाओगे
सड़क का जान या मुझे ढुकराओगे
नहीं मेरा कोई धर्म न मेरी कोई जाति,
जहां भी चाहो मुझे लगालो असीम हे मेरी ख्याति,
मेरा मोल नही बदलता ,
जितना सेठ के पास उतना गरीब पर चलता,
अच्छा न बुरा मैं हूं ,गरीब की रोटी में मैं हूं ,
गरीब की धोती में मैं हूं
अमीर के व्यंजन में मैं हूं,
अमीर के श्रृंगार में मैं हूं ,
तकरार में मैं हूं, प्यार में मैं हूं
सुहागन के सिंदूर में मैं रहता ,
अभागन पर अत्याचार मैं सहता,
जैसा चाहो मुझे बनालो,
साथ हूं मैं चाहे मुझे ठुकरालो,
पायल की झंकार में मैं ,
तलवार की टंकार में मैं,
मुझसे कतराना व्यर्थ है
कवि पाता मुझसे अर्थ है,
घर को मैं बनाता घर को उजाड़ता भी मैं,
बगिया संवारता और उसे उखाड़ता भी मैं,
ब्रह्मा की रचना हूं मैं,
मैं शब्द हूं चाहे जैसे अपनाओ ,
चाहे मुझे पहनो ओढ़ो या खा जाओ,
तुम्हारे हाथ हूं जहां चाहे मुझे सजाओ,
में तो रहूंगा चाहे छोड़ो या अपनाओ

सब सोच का चक्कर है


आगर किसी को चुनना हो तो कैसे चुनें
और रिजेक्ट करना हो तो कैसे रिजेक्ट करे--
साक्षात्कार में प्रश्नकर्ता -
आप डाग के स्पैलिंग बताओ
राम-dog
आप कैट के स्पैलिंग बताओ
रमेश- cat
आप निमोनोया के स्पैलिंग बताओ
महेश- सर ये पक्षपात है सभी से आसान सवाल और मुझसे कठिन
आप लगता है मुझे चुनना नहीं चाहते
चलो दोबारा पूछते हैं-
जलियां वले पार्क की फायरिंग किस देश में हुई
राम – भारत में
तुम बताओ ये जलियां वले पार्क की फायरिंग किस
राज्य में हुई कितने लोग मरे
रमेश- पंजाब में 1000 लोग मरे
तुम बताओ उन लोगों के नाम क्या थे जो इस फयरिंग में मारे गए
महेश-...............

सोच कैसी है वही काम बनाती है या बिगाड़ती है।

Friday, August 22, 2008

वो भी इंसान होता


जब कुत्ते कटखने हो जाते हैं
तब ही तो हम उनसे घबराते हैं
पर काटना उन्हें किसने सिखाया
उन्हें भौकना किसने सिखाया
नहीं जानते कौन कब क्या बन जाए
कौन भौके कौन कूके कौन गाए
वक्त ही भागता है वक्त ही भगवाता है
वक्त ही दौड़ाता है और दौड़वाता है
वक्त ही काटना सिखता है और कटवाता है
अगर उस वक्त उसे कुत्ता न कहा होता
तो आज वो बछड़ा गाय या
आप सा मुझ सा उन सा
सब सा हम सा इंसान होता..

Thursday, August 21, 2008

मैं ठीक हूं मैं ठीक हूं मैं ठीक हूं
शादी-विवाह, बच्चों का जन्म, नामकरण, मरण आदि इत्यी कई कारंण हैं अपस मे मेल मिलाप के । मिलने-जुलने से ही समाज आगे बढ़ता है। तनसुख राम जी हमरे मित्र हैं। अब उनका नाम तनसुख इनके माता-पिता ने रखा तो इसमें तनसुख जी का क्या दोष हमारे यहां नाम तब ही रख दिया जाता है जैसे ही बच्चे का जन्म होता है उससे पूछा तो जाता नहीं चलो अगर कोई पूछना भी चाहे तो वो बताने के काबिल भी तो नहीं होता और जब बताने के काबिल होता है तो कोई सुनता नहीं।यदि सभी को अपना नाम रखने की छूट दे दी जाए तो शायद उत्तर पश्चिम भारत में 80 प्रतिशत बच्चों का नाम धोनी या रितिक रोशन या एश्वर्या राय ही होता।अरे मैं कहां बहक चला नाम के चक्कर में मैं तो आपको तनसुख राम का किस्सा बताने वाला था। हमारे तनसुख के पास तन तो है भरपूर पर उसमें सुख का अभाव मानते हैं वो जानते हैं कि शरीर नश्वर होता है इस लिए उस पर अधिक इनवेस्टमेंट करना व्यर्थ है। बस इस शरीर में प्राण पले रहें इतना भर ही काफी है।उन्हें समझाने वाला मूर्ख ही होगा क्यों कि उन्हें लगता है कि किसी के समझाने से सम1ने में मूर्खता होगी अर्थात अगर वे समझने से समझ गए तो इसका मतलब होगा कि पहले वो नासमझी के काम कर रहे थे।हम भी चार मित्रों की चौकड़ी में विचरण करने वाले जीव हैं दर्शन,रंजीत रावत और मैं भी इस चौकड़ी के सदस्य हैं जहां भी जाते हैं इकठ्ठे ही जाते हैं मेरा मतलब किसी सामाजिक कार्यक्रम से है आप अधिक न समझ।
तन सुख जी बीमार होना ही मेल-मिलाप का सबसे उत्तम साधन मानते हैं । घर आने वाले मरीज का हाल चाल लेने के लिए कुछ न कुछ फल आदि ले ही आते हैं और बीमार के हाल चाल बताने में आने वाले का स्वागत भी कोई नहीं करे तो कोई फर्क भी नहीं पड़ता। कराह-कराह के आसमान सर पर उठा लेते हैं कि आने वाला समझ लेता है कि अब दो मिनट और रुका तो अपना कंधा देना पड़ सकता है । बस हर कोई उन्हे शीध्र स्वास्थय लाभ का आशीर्वाद दे फल आदि वहीं पटक निकल लेता है। मरीजदर्शनार्थी के जाते ही तन सुख भले चंगे हो उसके लाए फलों पर टूट पड़ते हैं। पर हमारी चांडाल चौकड़ी से भला कौन बच पाया है । भाई हम तो अपनी पर उतर आएं तो किसी बुजुर्ग की अर्थी से छुआरे लूट कर खीर बना खाएं। किसी को कुछ देने का हमारे यहां कोई चलन ही नहीं है। शादी में सगुन न दें,भिखारी को बक्शीष न दें
तनसुख बीमार हो भला उसका हाल चाल लेने हम न जाएं ये कहां की इंसानियत होगी।फिर उस मरीज पर न जाने कितने लोग फल चढ़ा गए होंगे अगर वो इन सब को खा गया तो कल का मरता आज मर जएगा और न खा पाया तो फल अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे। न ना ऐसा तो हम कदापि न होने देंगे अगर वो अति फलाहार से मर गया तो हम मित्रों पर बड़ा कलंक लगेगा। बस हम जा पहुंचे तनसुखिया धाम (घर) हमें देखते ही उसने खटोला पकड़ लिया जा लेटा छोटे से खटोले पर और लगा बीमारी राग अलापने (कराहने) । रंजीत बाबू ने उनके खटोले की पाटी पर जगह बनाते हुए कहा यार तूने बताया नहीं तू इतना बीमार है। तन सुख जी ने पैर मोड़ जगह बनाई बोले आओ बैठो ,दर्शन जी ने चिंता जताई हां आज कल बीमारी भी बहुत फैल रहीं हैं और खटोले का दूसरा किनारा पकड़ लिया तन सुख जी ने हाथ मोड़ते हुए उन्हें भी एडजस्ट किया खटोले पर। रावत जी ने दम मारते हुए बताया देखो आज कल मिलावट भी तो कितनी हो रही है हर चीज में साला कुछ भी खाना पीना बीमारी को दावत देना है।अच्छा खसा आदमी बीमार पड़ जाए बीमार की तो चलती ही क्या है। फलों में रंगों की सैक्रीन की मिलावट कर रहे हैं सले नर्क में जाएंगे पास रखा सेब उठा जबड़ों मे कसते हुए खटोले पर धस गए,तनसुख ने शरीर पतला कर इन्हें भी एडजस्ट किया । अभी मेरा तसल्लीनामा बाकी था मैंने उन्हें झिड़की दी अबे साले तनसुखिया हम लोग तेरे हाल चाल पूछने आए हैं घर में और कोई भी तेरा ध्यान रख रहा है कि नहीं ,भाभी जी नजर नहीं आ रहीं बाहर गईं हैं क्या । तन सुख जी ने बताया वो अंदर हैं । अबे हैं तो ठीक-ठाक रंजीत ने पूछा। जी वो तो ठीक हैं । रावत ने बोला चल फिर चाय वाय तो बनवा हमारे लिए । अब ये मरीज बेचारा क्या आवाज देगा भाभी को चलो में ही अंदर जा कर बोल आता हूं दर्शन ने अपना समाजसेवी धर्म निभा दिया । हमने तनसुख जी को समझाने के लिए बताया देख भाई हमारे पास तो फलतू वक्त होता नहीं कि लोगों के हाल चाल पूछने उनके घर जाते रहें आज कल इतनी दवाएं और सुविधाएं हो गईं हैं कि सब भले चंगे हो ही जाते हैं अब ऐसा तो है नहीं कि हम हाल नहीं पूछेगे तो तुम मर ही जाओगे।अरे भाई तुम तो किस्मत वाले हो वरना हम तो किसी भी मरीज के मर जाने पर केवल शव यात्राओं में ही शामिल होने जाते हैं, चलो ए खुशकिस्मत इंसान भाभी चाय तो बना रहीं हैं उन्हें बोल पकौड़े सकौड़े भी तल लेंगी, बोलते बोलते हमने भी खटोले में स्थान बना लिया पर हमरे स्थान के चक्कर में तनसुख जी जमीन पर जा पड़े अब एक खटोले पर चार-चार मुस्तंडे आ मरेंगे तो उस पर कितनी जगह बचेगी पर हमरी भलमनसात तो देखिए हमने तनसुख जी को उठा खटोले पर अपने साथ फिट कर ही लीया आखिर मरीज को आराम मिलना चाहिए । हम चारों ने चारों ओर से कस कर पकड़ लिया तनसुख जी को कहीं खटोले पर स्थानाभाव के कारण दोबारा जमीन पर न गिर पड़े ।
अब आप जानो हमरा भी कोई सम्मान है लोग चाय वाय पिला ही देते हैं और जो नहीं पिलाते उनके घर से हम तब तक नहीं टलते जब तक वो चाय न पिलवा दे भले ही हमें चार दिन उनके घर पर टिकना पड़े। तन सुख भी हमसे भली भांति परिचित हैं रावत जी ने उनके लिए रखे गए फल निबटाने के बाद डायलाग मारा भाभी कुछ ढीली हैं क्या अभी चाय नहीं बनी क्या। आरे भाग्यवान चाय ले आओ और कितनी देर लगाओगी अरे मेरा दम निकलने पर लाओगी मुझे दबा मरेंगे खटोले पर जल्दी ले आ ।
चाय आई भी हमने पी भी पकौड़े भी तले गए और हमने खाए भी।हां वहां से हम निकले भी क्या करें निकलना ही पड़ा बेचारे तनसुख जी को लोगों ने अस्पताल जो ले जाना था क्यों वो इस लिए कि हम चारों के खटोले पर बैठने से उनका दम जो फूल गया था। -अब वो पता नहीं कब स्वस्थ होगे उनके घर वालों ने वो खटोला खड़ा कर दिया है. जिसकी वजह से तनसुख जी अस्पताल पहुंचे। हम चारों ने सोच रखा है कि एक बार और जाएंगे उनके घर चाय पकौड़े लूटने यदि उनकी बीमारी चार छह दिन और चली तो वरना उनकी तेरहवीं में जाएंगे दावत उड़ाने......





Monday, August 18, 2008

आओ इनसे निपटें

मोबइल ने जितना सुख दिया उतना ही कष्ट भी दिया है।अब आप जानें कि कष्ट तो हमें ढूंढते ही रहते हैं। पर अक्सर गलत पते पर पहुंच जाते हैं। अब इन बैंक वलों को ले लीजिए साले ऐसे-ऐसे समय फोन करते हैं कि आप को भी तरस आ जाएगा । कल की बात है चिद्दी पहलवान मुझसे अपना कर्जा वसूलने आया था । मैं उसे समझा रहा था कि भाई हाथ तंग चल रहा है दो तीन दिन बाद आ जाना ... शायद वो मानने को उतारू भी होने वाला था पर इन्हे चैन कहां ICICI बैक से फोन आ मरा
बस चिद्दी ने घंटी सुन ली छीन लिया फोन बोला फोन तब मिलेगा जब मेरे पैसे लौटाएगा लगा फोन पर बात करने अब आप जानो बेंक वालों को लोन देने के सिवाय और क्या काम होता है। उनका एजेंट बोल रहा है साहब आपका लक्की ड्रा निकला है आपके लिए 50,000 रुपए का लोन सेंक्शन किया गया है बेंक द्वारा चैक तैयार है किस पते पर भिजवाना हे। मेंने चिद्दी को समझाया काट दे फोन बेकार की बकवास कर रहे हैं मैने कभी भी इनसे लोन के लिए नहीं कहा . पर चिद्दी कहां मानने वला था और वो माना भी नहीं दे दिया साले ने सहमति का हां । अपना पेसा ले कर चलता बना किस्त में भर रहा हूं।
जब तब फोन कर देते हैं ये प्राइवोट बैंक वाले फलां स्कीम में फलां लोन फलां स्कीम में फलां जान ले रखी है सालों ने एक संवाद देखें इनसे छुटकारा पाने का एक प्रयास -
बैं.-हेलो सर में ICICI बैक से आनंद बोल रहा हूं क्या मैं मि. विजय से बात कर रहा हूं।
वि.-जी कहिए
बैं-सर आप कौनसा क्रेडिट कार्ड यूज कर रहे हैं
वि-मैं कोई नहीं
बैं-क्या सर कोइ नहीं सर कोई तो करते ही होंगे
वि- क्यों चौक क्यों रहे हो क्या जीने के लिए जरूरी हैं क्या
बैं-नहीं सर सभी करते हैं सर हमारे बैंक ने एक स्कीम निकाली है क्रेडिट कार्ड की आपको चुना गया है
वि-क्यों जी मुझे क्यों चुना गया है चुनने के नाम से ही मेरे पसीने छूटने लगते हैं एक बार मुझे चुना था मेरी आज वाली पत्नी ने आज तक पिस रहा हूं।
बैं-सर हमारे बैंक ने स्कीम निकाली है जिस किसी के पास दिमाग है उनको फ्री क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा ( सले इतने चालू हैं कि जानते हैं कौन कहेगा कि उसके पास दिमाग नहीं है)
वि-(अब ये पाखंडी मनेगा नहीं) छत्तीस नौटंकी करेगा बना कर ही रहेगा या फिर हामी भरवा कर ही चैन लेगा। ( मेंने पेंतरी बदला ) अरे कौन अरे तुम आनन्द मैं बोल रहा हूं विजय पहचाना
बैं-जी सर
वि- य़ार कल कहां निकल गये तुम मुझे छोड़ कर में स्टेंड पर तुम्हरे चक्कर में बैठा रहा एक घंटा तुम अए ही नहीं
बैं- सर मैं ICICI बैक से बोल रहा हूं मैं तो नहीं मिला कल आपको
वि- अरे यार तुम अच्छा मजाक कर लेते हो कल तो आज मेरी कविता सुनने का वायदा किया था आज पहचान भी नहीं रहे हो
बैं- सर मैं ICICI बैक से बोल रहा हूं वो क्रेडिट कार्ड के बरे में मैं आपको बता रहा था
वि-अबे में तेरी बक-बक सुन लूं और तू मेरी एक कविता भी नहीं सुन सकता
बैं-पहले स्कीम के बरे में बात कर लें फिर कविता भी सुन लेंगे
वि- अबे में कवि हूं पागल नहीं पहले कविता फिर स्कीम तो सुन अर्ज किया है—
पहले-पहले जब उनसे मुलाकात हुई
कुल चार हमारी दो उनकी छह आंखों में बात हुई
वो शर्माए शर्माए शर्मा रही थी.
हम घबराए घबराए घबरी रहे थे
वो बोली वांणी में मदिरा घोली
तू चश्मा काहे न उतारे हमें लगते हें लिश्कारे
बैं सर बहुत बढ़िया मजा आ गया
वि-अभी से अभी तो और भी सुनानी हैं हेलो हेलो क्या हुआ काट दिया हेलो आनंद भाई
क्या हुआ काट दिया...
उसके बाद मुझे ब्कैक लिस्ट कर दिया ICICI बैक वालों ने अब फोन नहीं आते उनके...


Thursday, August 14, 2008

एक सितारा


अभिनव ने ले लिया गोल्ड मजा आ गया
10 मीटर से निशाना लगा विश्व में छा गया
अभी तो एक है और भी आएंगे
आगे आने वाले समय में कितने और छाएंगे
सोने की चिड़िया भारत था
फिर से मैडल सोने के कई जीत लाएंगे
भारत को फिर सोने की चिड़िया बनाएंगे
बधाई हो तुमको अभिनव बिंद्रा
सभी सोए खिलाड़ियों की अब टूटेगी निंद्रा

तिरंगा ऊंचा रहे हमारा









हमको तुमको उनको सबको स्वत्रंता दिवस की शुभकामनाएं
इनके उनके सबके साथ मिल खुशी से स्वत्रंता दिवस मनाएं

दोहे













पत्नी ऐसी चाहिए पाक बैरिन जो होय
बेलन पै कब्जा रहे विजय चैन से सोय।।

चूड़ियों का जमाना ला दो इलेक्ट्रानिक वाच
हाई हील के सेंडिल हों तब चलूं संग वाक ।।

इसकी देखी उसकी देखी हमारी न देखे कोय
जब हमारी किस्मत खुली हर कोई काहे रोय।।

प्रेमिका ऐसी राखिए, भाई बड़ा न होय
पकड़ पीटे बाजार में विजय असुअन रोय।।

Wednesday, August 13, 2008

धन्यवाद

राज जी आपक मैं तहे दिल से शुक्रिया करता हूँ आपका ब्लाग भी देखना चाहता हूँ अभी नया हूँ सीख रहा हूं और अधिक प्रयास करके आपके संपर्क में रहने की कोशिश करूंगा आप भी कुछ टिप्स देते रहना

मेरा घर परिवार


Monday, August 11, 2008

सौरी रोंग नंबर

हेलो .... हेलो
हेलो हेलो हां जी बोलिए कौन बोल रहे है
मैं बोल रहा हूं पहचाना ...हां मैं ...
नहीं पहचाना नाम बताइए ..कहां से बोल रहे हो
हां भाई अब क्यों पहचानोगे... जब मतलब निकल गया
भाई सच में नहीं पहचाना ..
अच्छा बता तू कौन बोल रही है ...
अरे कमाल आदमी हो फोन आपने किया है आप बताएं कौन बोल रहे हो ..
वा भाई वा फोन भी करो और नाम भी बताओ....देख सधी तरह बता दे कौन बोले सै न तो फोन का दूंगा ...
हां भाई काट दे मेरा भी टाइम वेस्ट मत कर
हां टाइम की बच्ची मेरी जो काल वेस्ट जा रही उसका पैसा क्या तेरा ताऊ देगा..
मैं कहे देती हूं मरे ताऊ पर मत जाना जान ले मुझसे बुरा कोई न होगा
कौन सै तेरा ताऊ मैं भी देखूं किसा खलीफा सै..
कहे देती हूं मेरे ताऊ को खलीफा मत कहना
क्यों री किसी पिच्चर का हीरो सै
हीरो हो या जीरो हो तुझसे मतलब
ना जी मने के मतबल सब बता दिओ पर अपना नाम मती ना बताइए
ईसा के भौडा नाम रखया है तेरे घर वालों ने के बताए को नी
न तो तू क्यों न बता देता तेरा नाम
...देखूं कितना चोखा धरा सै तेरे मां बाप ने तेरा नाम मैं भी तो देखूं
कति बावड़ा समझ रखा है के फोन भी करूं , काल भी वेस्ट करूं और
नाम भी बता दूं तने वा री समझदार की बच्ची

हां कालजादे के बच्चे काल वेस्ट होरी सै तो काट दे ना...
क्यों कर काट्टूं इबे नाम ते बताया न सै तणे । ये बता तूने फोन क्यों रखा है जब बात न करनी होती रे नाम तो बता दे इब के जान ले कर मनेगी मेरी जान......
के नाम-नाम लगा रखा सै ले सुण ले तेरी मां का नाम चमेली सै, इब के करेगा नाम का खसम
शोरी चमेली रांग नम्बर .........

Friday, August 8, 2008

सोचा नहीं