Thursday, August 14, 2008

दोहे













पत्नी ऐसी चाहिए पाक बैरिन जो होय
बेलन पै कब्जा रहे विजय चैन से सोय।।

चूड़ियों का जमाना ला दो इलेक्ट्रानिक वाच
हाई हील के सेंडिल हों तब चलूं संग वाक ।।

इसकी देखी उसकी देखी हमारी न देखे कोय
जब हमारी किस्मत खुली हर कोई काहे रोय।।

प्रेमिका ऐसी राखिए, भाई बड़ा न होय
पकड़ पीटे बाजार में विजय असुअन रोय।।

2 comments:

राज भाटिय़ा said...

विजय दास (कबीर दास के बाद) जी आप के दोहे बहुत ही अच्छे लगे, बस शब्द काफ़ी छोटे हे, थोडे ज्यादा बडे हो तो पढने मे आसानी होगी,धन्यवाद

विजय कुमार शर्म said...

आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद भविष्य मे फोंट बड़े रखूंगा