मोबइल ने जितना सुख दिया उतना ही कष्ट भी दिया है।अब आप जानें कि कष्ट तो हमें ढूंढते ही रहते हैं। पर अक्सर गलत पते पर पहुंच जाते हैं। अब इन बैंक वलों को ले लीजिए साले ऐसे-ऐसे समय फोन करते हैं कि आप को भी तरस आ जाएगा । कल की बात है चिद्दी पहलवान मुझसे अपना कर्जा वसूलने आया था । मैं उसे समझा रहा था कि भाई हाथ तंग चल रहा है दो तीन दिन बाद आ जाना ... शायद वो मानने को उतारू भी होने वाला था पर इन्हे चैन कहां ICICI बैक से फोन आ मरा
बस चिद्दी ने घंटी सुन ली छीन लिया फोन बोला फोन तब मिलेगा जब मेरे पैसे लौटाएगा लगा फोन पर बात करने अब आप जानो बेंक वालों को लोन देने के सिवाय और क्या काम होता है। उनका एजेंट बोल रहा है साहब आपका लक्की ड्रा निकला है आपके लिए 50,000 रुपए का लोन सेंक्शन किया गया है बेंक द्वारा चैक तैयार है किस पते पर भिजवाना हे। मेंने चिद्दी को समझाया काट दे फोन बेकार की बकवास कर रहे हैं मैने कभी भी इनसे लोन के लिए नहीं कहा . पर चिद्दी कहां मानने वला था और वो माना भी नहीं दे दिया साले ने सहमति का हां । अपना पेसा ले कर चलता बना किस्त में भर रहा हूं।
जब तब फोन कर देते हैं ये प्राइवोट बैंक वाले फलां स्कीम में फलां लोन फलां स्कीम में फलां जान ले रखी है सालों ने एक संवाद देखें इनसे छुटकारा पाने का एक प्रयास -
बैं.-हेलो सर में ICICI बैक से आनंद बोल रहा हूं क्या मैं मि. विजय से बात कर रहा हूं।
वि.-जी कहिए
बैं-सर आप कौनसा क्रेडिट कार्ड यूज कर रहे हैं
वि-मैं कोई नहीं
बैं-क्या सर कोइ नहीं सर कोई तो करते ही होंगे
वि- क्यों चौक क्यों रहे हो क्या जीने के लिए जरूरी हैं क्या
बैं-नहीं सर सभी करते हैं सर हमारे बैंक ने एक स्कीम निकाली है क्रेडिट कार्ड की आपको चुना गया है
वि-क्यों जी मुझे क्यों चुना गया है चुनने के नाम से ही मेरे पसीने छूटने लगते हैं एक बार मुझे चुना था मेरी आज वाली पत्नी ने आज तक पिस रहा हूं।
बैं-सर हमारे बैंक ने स्कीम निकाली है जिस किसी के पास दिमाग है उनको फ्री क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा ( सले इतने चालू हैं कि जानते हैं कौन कहेगा कि उसके पास दिमाग नहीं है)
वि-(अब ये पाखंडी मनेगा नहीं) छत्तीस नौटंकी करेगा बना कर ही रहेगा या फिर हामी भरवा कर ही चैन लेगा। ( मेंने पेंतरी बदला ) अरे कौन अरे तुम आनन्द मैं बोल रहा हूं विजय पहचाना
बैं-जी सर
वि- य़ार कल कहां निकल गये तुम मुझे छोड़ कर में स्टेंड पर तुम्हरे चक्कर में बैठा रहा एक घंटा तुम अए ही नहीं
बैं- सर मैं ICICI बैक से बोल रहा हूं मैं तो नहीं मिला कल आपको
वि- अरे यार तुम अच्छा मजाक कर लेते हो कल तो आज मेरी कविता सुनने का वायदा किया था आज पहचान भी नहीं रहे हो
बैं- सर मैं ICICI बैक से बोल रहा हूं वो क्रेडिट कार्ड के बरे में मैं आपको बता रहा था
वि-अबे में तेरी बक-बक सुन लूं और तू मेरी एक कविता भी नहीं सुन सकता
बैं-पहले स्कीम के बरे में बात कर लें फिर कविता भी सुन लेंगे
वि- अबे में कवि हूं पागल नहीं पहले कविता फिर स्कीम तो सुन अर्ज किया है—
पहले-पहले जब उनसे मुलाकात हुई
कुल चार हमारी दो उनकी छह आंखों में बात हुई
वो शर्माए शर्माए शर्मा रही थी.
हम घबराए घबराए घबरी रहे थे
वो बोली वांणी में मदिरा घोली
तू चश्मा काहे न उतारे हमें लगते हें लिश्कारे
बैं सर बहुत बढ़िया मजा आ गया
वि-अभी से अभी तो और भी सुनानी हैं हेलो हेलो क्या हुआ काट दिया हेलो आनंद भाई
क्या हुआ काट दिया...
उसके बाद मुझे ब्कैक लिस्ट कर दिया ICICI बैक वालों ने अब फोन नहीं आते उनके...
Monday, August 18, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

5 comments:
विजय जी मजा आ गया आप का लेख पढ कर, वेसे यह बेंक वाले,बीमे वाले,तंग बहुत करते हे,कल के लेख का इन्तजार रहेगा, धन्यवाद
shaandaar....
sach me yahan jaandaar vijay se hi mulakaat hui
badhaai ho
Saree sachai chhaap de
ICICI wale ab aapake nam se kaanp jaate honge.....?
ओ जी कमाल का तरीका बताया है आपने, मेहरबानी जी.
विजय जी, आपने तो छक्का मार दिया - जो किसी की नहीं सुनते उन्हें अपनी कविता सुना डाली। वाह मजा आ गया। वैसे भी कवियों को आजकल श्रोता मिलते कहां हैं?
carry on......
Post a Comment