पे कमीशन के साइड अफेक्ट्स
आ गया छटा वेतन आयोग
लग भी जाएगा नए वेतन का भोग
हर कोई फूला नहीं समा रहा है
सुना है मजा सभी को आ रहा है
घर में सब पर छाई उमंग है
पूरे घर पर चढा एक अजीब सा रंग है
खुल जाएगी जेब अभी जो तंग है
बेटे ने पुराने कपड़े फड़ ड़ाले है
कहां से नए कपड़े लेने हैं विज्ञापन खोज निकाले हैं
कहता है पापा सौ के नोट से अब काम न चलेगा
अब तो मुझे पांच सौ का नोट जेब खर्च में मिलेगा
आप भी पजम्मा छोड़ बरमूडा सिलवोओ
मेरी साइकिल दान करो मोटर साइकिल दिलवाओ
पत्नी ने भी अपनी सारी पुरानी साड़ी फाड़ डालीं हैं
नई पे पर नई साड़ी लूंगी कोप भवन की बत्ती बुझाली है
पुराने रिजेक्ट कर नए जेवर लेने पर अड़ी है
उसकी तो फैरिस्त वेतन आयोग से भी बड़ी है
कब तक पुराने कंगन मंगल सूत्र से काम चलाऊंगी
नए सौंद्रालय में जा कर बाल भी सेट करवाऊंगी
घर के टाट से पर्दे हटा कर नए महीन लगवाऊंगी
इतनी तनख्वा लेने पर मोटे तोंदू से न भाओगे
संग मेरे रहना है तो जान लो
सुबह मूंह अंधेरे दौड़ लगा तोंद के मटके को सुखाओगे
नहीं चीहिए राशन घर में लाला परचुनी लाल का
हर माह दो बार चक्कर लगवाओगे किसी माल का
मेरे पापा का सूट पहन इस नौकरी का इंटरव्यू दिया था
पहली पे से पापा के नए कपड़े सिलवाने का वायदा किया था
अब कब तक टाले जाओगे
कहे देती हूं मम्मी पापा के कपड़े एरियर मिलते ही सिलवाओगे
नहीं जान लो दहेज में मिले सारे नग बेच डालूंगी
उनके लिए कपड़े उसी पैसे से सिवालूंगी
नहीं जानती भाग्यवान यदि ये वेतन में पहले पा जाता
क्यों विवाह तुझ गरीब की बेटी से कर भाग्य अपना फुड़वाता
बढ़े वेतन की पे स्लिप लगा संशोधित दहेज का पर्चा ससुराल भिजवाऊंगा
कम वेतन पर दिए दहेज का नए पे स्केल के अनुसार एरियर बनवाऊंगा
दहेज में मिली सइकिल वापस कर कार की गुहार लगाऊंगा
नहीं मिली कार तो क्या कर लूंगा साइकिल ही चलाऊँगा
नए वेतन में ए सी पी 10 साल में मिल जाएगी
इतना वायदा कर हे प्राणों की प्यसी हर 10 दिन में मायके जरूर जाएगी
नहीं जानती बावली नया वेतन नहीं कोई चिरागे अलादीन
मंहगाई का नाग भी फनफना उठा है सुन पे कमीशन की बीन
मेरे तेरे हाथ कुछ न लग पाएगा
सरकार का दिया पैसा लाला को देते आए हैं
सब लाला ही ले जाएगा
बाबू पहले भी लोन पर पलता था
अब भी लोन से काम चलाएगा
बस दो दिन छटे वेतन आयोग की चांदनी के रहेंगे फिर अंधेरा आएगा
देख लेना फिर हर कोई सातवें वेतन आयोग पर टकटकी लगाएगा
आ गया छटा वेतन आयोग
लग भी जाएगा नए वेतन का भोग
हर कोई फूला नहीं समा रहा है
सुना है मजा सभी को आ रहा है
घर में सब पर छाई उमंग है
पूरे घर पर चढा एक अजीब सा रंग है
खुल जाएगी जेब अभी जो तंग है
बेटे ने पुराने कपड़े फड़ ड़ाले है
कहां से नए कपड़े लेने हैं विज्ञापन खोज निकाले हैं
कहता है पापा सौ के नोट से अब काम न चलेगा
अब तो मुझे पांच सौ का नोट जेब खर्च में मिलेगा
आप भी पजम्मा छोड़ बरमूडा सिलवोओ
मेरी साइकिल दान करो मोटर साइकिल दिलवाओ
पत्नी ने भी अपनी सारी पुरानी साड़ी फाड़ डालीं हैं
नई पे पर नई साड़ी लूंगी कोप भवन की बत्ती बुझाली है
पुराने रिजेक्ट कर नए जेवर लेने पर अड़ी है
उसकी तो फैरिस्त वेतन आयोग से भी बड़ी है
कब तक पुराने कंगन मंगल सूत्र से काम चलाऊंगी
नए सौंद्रालय में जा कर बाल भी सेट करवाऊंगी
घर के टाट से पर्दे हटा कर नए महीन लगवाऊंगी
इतनी तनख्वा लेने पर मोटे तोंदू से न भाओगे
संग मेरे रहना है तो जान लो
सुबह मूंह अंधेरे दौड़ लगा तोंद के मटके को सुखाओगे
नहीं चीहिए राशन घर में लाला परचुनी लाल का
हर माह दो बार चक्कर लगवाओगे किसी माल का
मेरे पापा का सूट पहन इस नौकरी का इंटरव्यू दिया था
पहली पे से पापा के नए कपड़े सिलवाने का वायदा किया था
अब कब तक टाले जाओगे
कहे देती हूं मम्मी पापा के कपड़े एरियर मिलते ही सिलवाओगे
नहीं जान लो दहेज में मिले सारे नग बेच डालूंगी
उनके लिए कपड़े उसी पैसे से सिवालूंगी
नहीं जानती भाग्यवान यदि ये वेतन में पहले पा जाता
क्यों विवाह तुझ गरीब की बेटी से कर भाग्य अपना फुड़वाता
बढ़े वेतन की पे स्लिप लगा संशोधित दहेज का पर्चा ससुराल भिजवाऊंगा
कम वेतन पर दिए दहेज का नए पे स्केल के अनुसार एरियर बनवाऊंगा
दहेज में मिली सइकिल वापस कर कार की गुहार लगाऊंगा
नहीं मिली कार तो क्या कर लूंगा साइकिल ही चलाऊँगा
नए वेतन में ए सी पी 10 साल में मिल जाएगी
इतना वायदा कर हे प्राणों की प्यसी हर 10 दिन में मायके जरूर जाएगी
नहीं जानती बावली नया वेतन नहीं कोई चिरागे अलादीन
मंहगाई का नाग भी फनफना उठा है सुन पे कमीशन की बीन
मेरे तेरे हाथ कुछ न लग पाएगा
सरकार का दिया पैसा लाला को देते आए हैं
सब लाला ही ले जाएगा
बाबू पहले भी लोन पर पलता था
अब भी लोन से काम चलाएगा
बस दो दिन छटे वेतन आयोग की चांदनी के रहेंगे फिर अंधेरा आएगा
देख लेना फिर हर कोई सातवें वेतन आयोग पर टकटकी लगाएगा

