Monday, September 24, 2012
मंदी
विश्व पूरा शिकार है मंदी के दौर से
बताता हूं आपको सुनिए गौर से
बच्चे ने भी डैडी जी से जी निकाल दिया है
डैडी जी को डैड बना दिया है
मंदी में यदि बने रहना है तो दो गुने घंटे काम करना होगा
खाना बनाने के बाद बर्तन भी धोना होगा
पत्नी ने समझाया
तुम्हें बताऊं मंदी में प्रेम कैसे जताओगे
बिस्तर पर आओगे मेरे पैर दबाओगे और सो जाओगे
कटौती हर जगह करनी होगी क्योंकि ये है मंदी
मैं भी त्याग दूंगी लगाना सिंदूर और बिंदी
मैं करती त्याग, सुहाग, खुद को कुंवारी बताऊंगी
प्रेमिका बन आपसे चांद सितारे तुड़वाऊंगी
तुम्हें भी मंदी में त्याग करना होगा
पेंट छोड़ नेकर पहनना होगा
नहीं अत्याचारणी में भी मंदी में मंद हो जाऊंगी
साड़ी दुपट्टा छोड़ स्कर्ट मिडी पर उतर आऊंगी
मंदी में सब मंद-मंद चलेगा मैं अपने मां बाप
और करेंगे सेवा अपने सास ससुर की आप
ऐसे ही ये मंदी का दौर गुजर जाएगा
फिर एक दिन डैड डैडी जी हो जाएंगे
आप मेरे भी प्रेमी से पति हो जाएंगे
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