Thursday, October 4, 2018


नहीं मरा मैं
जहर खा कर
खालिस न था

कुछ को मिले
खाने को हे ईश्वर
बिना रिश्वत ...........

मार दे गोली
मरूंगा फिर नहीं
मुर्दे क्या मरें......

बिना शर्त के
प्यार नहीं व्यापार
कर दे देख

तप्त धरती
वृक्ष की छांव मिले
पल औ जी लें.........
रेगिस्तान है
खिले दिल खाली सा
मिले तुम सा

मेरी छत है
रोज चांद आता है
जो तू आता है .................

करवा वृत
तू रखे तो मैं जीता
प्रेम जिलाता..........

दीप की तू लौ
प्रेम मेरा स्नेह है
     मिली राह है............

Thursday, September 27, 2018

कुछ हाइकु


ठंडा मौसम
चुभता है दंदान (रजाई के अंदर की गर्मी)
संघा (साथ) चाहिए............

 दरकार है
दारित (भयाक्रांत) रहता हूं
दरीचा (झरोखा) दिखा............

पंकिल तन
पयोध (मेघ) सा बन तू
पत्रोण (रेशमी वस्त्र) स्पर्ष............

मैं परवश
परंपराप्रसूत
ना पराभूत.......

भास्वत ( प्रकाश/ सूर्य) है
पर दिखता नहीं
कोहरा हटा.................

झंसना (धोखा देना) हमें
है सबसे सरल
पीते गरल..................

तंजेब (महीन हार) रिश्ते
गहरे हो सकते
तंत्र (धागा) पर है..............

तजल्ली (ईश्वर का प्रकाश) देख
चुंधिया गया हूं
दिखा तू मार्ग..............