ठंडा मौसम
चुभता है दंदान
(रजाई के अंदर की गर्मी)
संघा (साथ) चाहिए............
दरकार है
दारित (भयाक्रांत)
रहता हूं
दरीचा (झरोखा) दिखा............
पंकिल तन
पयोध (मेघ) सा बन तू
पत्रोण (रेशमी
वस्त्र) स्पर्ष............
मैं परवश
परंपराप्रसूत
ना पराभूत.......
भास्वत ( प्रकाश/ सूर्य) है
पर दिखता नहीं
कोहरा
हटा.................
झंसना (धोखा देना)
हमें
है सबसे सरल
पीते
गरल..................
तंजेब (महीन हार)
रिश्ते
गहरे हो सकते
तंत्र (धागा) पर
है..............
तजल्ली (ईश्वर का
प्रकाश) देख
चुंधिया गया हूं
दिखा तू
मार्ग..............


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