नहीं मरा मैं
जहर खा कर
खालिस न था
कुछ को मिले
खाने को हे ईश्वर
बिना रिश्वत
...........
मार दे गोली
मरूंगा फिर नहीं
मुर्दे क्या
मरें......
बिना शर्त के
प्यार नहीं व्यापार
कर दे देख
तप्त धरती
वृक्ष की छांव मिले
पल औ जी लें.........
रेगिस्तान है
खिले दिल खाली सा
मिले तुम सा
मेरी छत है
रोज चांद आता है
जो तू आता है
.................
करवा वृत
तू रखे तो मैं जीता
प्रेम जिलाता..........
दीप की तू लौ
प्रेम मेरा स्नेह
है
मिली राह
है............
